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अश्रु पूरित आँखों से स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को विनम्र श्रद्धांजलि
नैतिकता के अमर पुजारी नमन है अटल बिहारी को
राजनीति के कुशल खिलाड़ी नमन है अटल बिहारी को
वाणी में वीणापाणी थी अंतस् में था ओज प्रबल
लब से निकले शब्द अनोखे बनते थे सबके संबल
दुश्मन से भी जिसकी यारी नमन है अटल बिहारी को
सूर्य समान सितारा नभ के धीर पुरूष थे धरनी का
सोच समंदर सा विशाल था वैर भी कायल करनी का
सौ सौ पर जो एक थे भारी नमन है अटल बिहारी को
शब्द शिरोमणि सत्य उपासक पावन पथ के पथिक अथक
बाधायें मग में आये तो बन जाते थे मनुज पृथक
श्रद्धा सुमन देते नर नारी नमन है अटल बिहारी को
निष्कलंक निष्कपट हृदय था करते सभी गुणगान हैं
बैरी भी सहकर्मी बनते नर पुंगव वे महान हैं
नीर आँख में लिये तिवारी नमन है अटल बिहारी को ।
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मन बा तबे मजाक बा , बिन मजाक सब सून
मन पो केहू मत लिही , खिले समाज प्रसून
ए मलकिनी मन करत बा बन जाईं सन्यासी
तोहरो किच-किच मन ना भावे लागे गरदन फाँसी
बन जाईं सन्यासी रउआ हम ना रोक लगाइब
झाडू पोंछा करे खातिर बाकिर रउआ आइब
माथ छिलाईं चाहे राखीं लामा लामा झोंटा
फिरके रउआ घरे ना आइब रखले बानी सोंटा
सात जनम के ठेका रहे एही जनम में टूटल
कारन का सन्यास के बाटे हमरो करम बा फूटल
एटीएम पेटिएम और मोबाइल हमरो हाथ थमाईं
लोटा डंटा बिहटी लेके जहँवा मन बा जाईं
चेला भले बनाइब रउआ चेली नाहीं चली
जे दिन मन में पाप समाई चल जाई दुनली
फिर त हमर पलानिंग कैंसिल तोहरे गोड़ दबाइब
सन्यासी सनकाई अब ना गिरहतिये मुक्ति पाइब
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हमनी के देशवा पो नाज बा ए भाइजी
हमनी के देशवा पो नाज बा ।।
धरती के माई कहे सूरज के देवता
पहिले पेठावे लोग मंदिर में नेवता
प्यार से पवित्तर ई समाज बा ए भाइजी
हमनी के देशवा पो नाज बा ।।
गंगाजी क पनिया में बूटी बा समाइल
योग क के उमिर में बढंती बाटे आइल
भरल रहे कोठी में अनाज बा ए भाइजी
हमनी के देशवा पो नाज बा ।।
सीमा प पहरा देले मोंछ वाला भइया
गुन गावे देशवा के बाबाजी कन्हइया
दुश्मन खाति अलगे अंदाज बा ए भाइजी
हमनी के देशवा पो नाज बा ।।
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एगो फौजी के पत्नी सीमा पर तैनात पति के प्रोत्साहन देत बिआ
भले खाइब नून रोटी , सैंया भिनुसहरा
पिया अइह जन घरवा दीहऽ , सीमवा पो पहरा ।।
दुश्मन नाहीं कवनो जाए, पावे ए जमीन से
दाग दीहऽ गोलिया झट से , सैंयाजी मशीन से
करजा उतारे खाती मोका बा सुनहरा
पिया अइह जन घरवा दीहऽ , सीमवा पो पहरा ।।
पिया अइह जन घरवा दीहऽ , सीमवा पो पहरा ।।
दुश्मन नाहीं कवनो जाए, पावे ए जमीन से
दाग दीहऽ गोलिया झट से , सैंयाजी मशीन से
करजा उतारे खाती मोका बा सुनहरा
पिया अइह जन घरवा दीहऽ , सीमवा पो पहरा ।।
मन करे संगे तोहरा सीमावा पो जइतीं
दे के कुर्बानी आपन करजा चुकइतीं
सेवा करे वीर लोग के जइतीं लमहरा
पिया अइह जन घरवा दीहऽ , सीमवा पो पहरा ।।
दे के कुर्बानी आपन करजा चुकइतीं
सेवा करे वीर लोग के जइतीं लमहरा
पिया अइह जन घरवा दीहऽ , सीमवा पो पहरा ।।
रसिकजी देले बाडन एगो गुरू मंतर
दिल में जगाइब अपना जोश के समुंदर
जान लेबे देबे खातिर रहब हम अगहरा
पिया अइह जन घरवा दीहऽ , सीमवा पो पहरा ।।
दिल में जगाइब अपना जोश के समुंदर
जान लेबे देबे खातिर रहब हम अगहरा
पिया अइह जन घरवा दीहऽ , सीमवा पो पहरा ।।
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माता के प्रति
मिले रहेंगे मुट्ठी बनके सर्दी ताप सहेंगे
कभी न होंगे विचलित पथ से सत्य वचन कहेंगे
गुरू का गर आदेश मिला तो पत्थर से टकरायेंगे
माँ का दामन रहे दमकता ऐसा पथ अपनायेंगे
हीन भावना नहीं है मन में कर्मठ एक सिपाही हूँ
जो चमके अंधेरे में भी वो द्युति युक्त मैं स्याही हूँ
हर हालात में हर्षित होना गुरू ने मुझे सिखाया है
धरती पर रहकर धरती से करना प्यार बताया है
माँ की ममता कभी न कलुषित होगी ये संकल्प लिया
माँ की चरणों की सेवा का हरगिज़ नहीं विकल्प दिया
रसिक कन्हैया पद पाकर भी माँ का न अपमान करो
जो माता की करे निरादर लानत है जा डूब मरो
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मुसाफ़िर हूँ अंजान सफर का
मंजिल नहीं आसान है
साथी कोई साथ नहीं है
साथ सिर्फ भगवान है
ना पूजा ना पाठ करू मैं
ना विनती अरदास
ना जाने कैसे बन पाया
परम पिता का खास
कान पकड़कर कहता मुझसे
माँ बाप को चरण स्पर्श करो
ता पीछे विचरो समाज में
जीवन का संघर्ष करो
आनन पर मुस्कान बिखेरो
चंदन गंध घनेरे
लिपटे रहेंगे अरि भुजंग
तेरे तन से बहुतेरे
शब्द साधना कभी न त्यागो
जीवन में बस जागो
हीत मीत अरि और दुलारे
कुशल क्षेम बस माँगो
स्रष्टा का अनुपम रचना जग
सबको वही सम्भाले
शब्द शरों से क्यों करते हो
अपने मुह में छाले
सबका शुभ हो कहे कन्हैया
सेवक बनके धाये
रस की गगरी रसिक उड़ेले
सबके मन को भाये
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मजहब के नाम पर
याद सभी को करेंगे मजहब के नाम पर
मिल बाँटके खायेंगे मजहब के नाम पर
हो कहीं भी इबादत दिल साथ में रखना
बिछुड़े न कोई दोस्त ये फरियाद में रखना
नफरत को नकारेंगे मजहब के नाम पर
मिल बाँटके खायेंगे मजहब के नाम पर
अपना हो या पराया सब में उसी की छाया
छत्रप में तेरे नाम को उसने हीं है लिखाया
इस ज्ञान को लायेंगे मजहब के नाम पर
मिल बाँटके खायेंगे मजहब के नाम पर
रेचन से रोज निर्मल निज भान को करना
आनंद के लम्हों से है ज्ञान को भरना
कान्हा को मनायेंगे मजहब के नाम पर
मिल बाँटके खायेंगे मजहब के नाम पर
जो लोग जुदा हो गये बुलायेंगे प्यार से
दर दिल का खुला है उन्हे बिठायेंगे प्यार से
दूरी को मिटायेंगे मजहब के नाम पर
मिल बाँटके खायेंगे मजहब के नाम पर
इंसानियत के राह पर चलना है सभी को
इस मुल्क की तहज़ीब में ढ़लना है सभी को
किसी को न भटकायेंगे मजहब के नाम पर
मिल बाँटके खायेंगे मजहब के नाम पर
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दिल आ दिमाग
हम दिल हईं रउआ दिमाग
हमरा में पानी बा राउआ में आग
हम प्यार से अपना में मिलाइना
रउआ तर्क से लो के दूर भगइना
हम रउआ से प्यार करीं
इ हमार संस्कार ह
रउआ हमार मजाक उड़ाई
अभिव्यक्ति के अधिकार ह
सही कहतानी
आकाश में उड़ेवाला के
जमीन पो चलेवाला
पिलुआ लागेला
एहमें राउर दोष नइखे
ज्ञान के गरिमा तबे बढ़ेला
जब दिमाग के दउरावल जाय
जवन चीज पसंद नइखे
ओकरा के गलत बतावल जाय
हमनी के त गोबर में गनेश आ
सेनुर में सोहाग लउकेला
जमीन पो नु बानी जा
एह से एक दुसरा से
मिलेके आदत बा
बहरीओ वाला के
दिल से स्वागत बा
हमनी के त इ जानेली सन
कि आदमी ह त अपने लेखा होई ।
रउआ सोचेनी कि पोआ ह कि पोई
बाकि इ मत भूलीं कि
जब दिमाग थाक जाला
तबहु दिल चलेला
एक दुसरा से मिलेला
एह से दिल पो
अछरंग मत लगाईं
आ नाक पो के सेनुर के
गलत मत बताईं।
दिमाग तर्क करेला दिल संपर्क करेला
दिल के मनब त दिमाग सतर्क करेला
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मैं
मैं
मैं हूँ
मैं हीं हूँ
मेरा शब्द शमशीर है
मेरी सोच श्रेष्ठ है सबसे
बात , पत्थर पर लकीर है
मेरी बात काटने वाले
अनपढ़ और अज्ञानी हैं
ज्ञान की गगरी खाली सबकी
मेरी गगरी पानी है
गर्दभ गान सभी करते हैं
मेरा राग सुरीला है
सब मनहूस हैं मुँह लटकाये
मेरा भाव रंगीला है
मैं , मैं, करते मर गया
मैं को कभी न जीता
मैं कहता है भरा हुआ मैं
लेकिन मैं है रीता
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निर्गुन
आवे नाहीं निंद हमरो रतिया पराती में
कहँवा परइले सैंया दरद देके छाती में ।।
टुकुर टुकुर ताके ल पलकियो ना गिरेला
ए सैंया छतिया के बाता नाहीं हिलेला
बाता नाहीं हिलेला
हाथ गोड़ पाला लागे जइसे बरसाती में ।।
कहँवा परइले सैंया दरद देके छाती में ।।
काहें खातिर जुटल बाड़े दुआरा पो लोगवा
छाती पीटी बोले माई सुगवा रे सुगवा
सुगवा रे सुगवा
हावा नइखे फेंकत कादो भाभड़ भइल भाथी में ।।
कहँवा परइले सैंया दरद देके छाती में ।।
छोटकी गोतिनिया काहें थुरेले कलाई
चाची काहें दिहली सिन्होरवा गिराई
सिन्होरवा गिराई
हँकड़त हुँड़ार रसिक अब ना रही पाँति में ।।
कहँवा परइल सैंया दरद देके छाती में ।।
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पूर्ण सत्य
चिता पर लाश है मेरी
तमाशा बन रहा हूँ मैं
आठ सौ वोल्ट की देवी
कृपा से जल रहा हूँ मैं
न पढ़ पाया कभी भी मैं
राम का नाम सच्चा है
रटाया जा रहा हूँ मैं
सामने सुबोध बच्चा है
खाक हो गया तन
फिर भी कुछ जिन्दा था
जो देख रहा था सबकुछ
आखिर वो कौन परिंदा था
समझो उसको मनन करो
मृत्यु दर्शन का वर्णन करो
अब तो छोड़ो हेरा फेरी
प्रभु के आगे समर्पण करो
आई है अब गोधूली वक्त
सब इच्छाऐं हो जाये त्यक्त
परिवेश विमल करने खातिर
रसिक तू हो जा परम भक्त
अरमान बाँधके रखता है
पुनरागमन का फल चखता है
मार लो डुबकी जीते जी
वह दिव्य पुरूष निरखता है
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छठ के गीत
तन बा बिदेश मन गाँवे बा ए माई
रहि रहि याद आवे छठ के पुजाई ।।
उखिया शरीफा फल
दउरा लेके माथे चलल
रहि रहि याद आवे ठेकुआ बनाई ।।
तन बा बिदेश मन गाँवे बा ए माई
रहि रहि याद आवे छठ के पुजाई ।।
जोड़ा कलसूप नरियर
धोतिया पहिरी पियर
रहि रहि याद आवे घाट के लिपाई ।।
तन बा बिदेश मन गाँवे बा ए माई
रहि रहि याद आवे छठ के पुजाई ।।
बहंगी के लचकन
याद आवे बचपन
भिखिया में मिले फल ठेकुआ मिठाई
तन बा बिदेश मन गाँवे बा ए माई
रहि रहि याद आवे छठ के पुजाई ।।
बाबा भूंइपरी करस
बबुआ के भारा भरस
देख देख हुलसेले रसिक कन्हाई ।।
तन बा बिदेश मन गाँवे बा ए माई
रहि रहि याद आवे छठ के पुजाई ।।
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हमार मेहरी
सवाल
ए रसिक बाबा जिनिगी के हकीकत बताईं
कइसे पार पावल जाय घरनी से तनि समझाईं
रोजके किच किच से जीअल मोहाल हो गइल बा
सभ भिरी बा बाकि किरकिरी के हाल हो गइल बा
बाबा के जबाब
घरनी त हमरा के पेरके रखले बाड़ी
घर में शेर ना बटेर बनाके रखले बाड़ी
कइसे हम राह बताईं रउआ के ए भाईजी
गरदन पो उ हमरा शमशेर के रखले बाड़ी
नावे के रसिक बानी , रस कुल्ह चुआ लेले बाड़ी
आसमान में उड़त अरमान के मुआ देले बाड़ी
अब त खलिहा खोखा लेखा ढ़नढ़नात बानी
पहिले जवन ताजा रहत रहे ओकरा के अरूआ देले बाड़ी
रोज पढ़ावतारी राम गति डेहरी
नइखे लागत साझि के फुटेहरी
डाँटके सभ काम करवा लेली
अइसन मिलल बाड़ी हमार मेहरी
जइसन मिलल बाड़ी संतोष करीं
दोसरा के देखके आह मत भरीं
सभके गति धरती पो एके लेखा बा
हमहुँ डेरात बानी घरनी से रउओ डरीं
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दिल में बैठ गये हो तुम तो किससे मैं फरियाद करूँ
हर पल वाणी में बसते हो किससे मैं संवाद करूँ
पूर्ण भरोसा तुम पर है तुम सब में ही दिखते हो
हृदय की धड़कन चलती है तो कैसे मैं अवसाद करूँ
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छापा परे कोइला पो हीरा लुटाता
लोगवा के इहे सभ रसगर बुझाता
चुटकी भर सेनुर के मोल केहु ना जाने
अखड़ेरे चउराहा पो सेनुर लुटाता
लोगवा के इहे सभ रसगर बुझाता
चुटकी भर सेनुर के मोल केहु ना जाने
अखड़ेरे चउराहा पो सेनुर लुटाता
आपन फयदा से कयदा बिगड़ गइल
पुरूखा पुरनिया के सोच आज सड़ गइल
दसे डेग फयदा लउकता आँख से
सौ डेग लंगड़ा पहाड़ पो चढ़ गइल
पुरूखा पुरनिया के सोच आज सड़ गइल
दसे डेग फयदा लउकता आँख से
सौ डेग लंगड़ा पहाड़ पो चढ़ गइल
गोड़ लागतानी केहु आज काल्ह नइखे कहत
सभके जबान पो हाय हैलो रहत बा
रसिक के बोली अब बाउर लागे सभके
गारी के मुहे सभे बात आपन कहत बा
सभके जबान पो हाय हैलो रहत बा
रसिक के बोली अब बाउर लागे सभके
गारी के मुहे सभे बात आपन कहत बा
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पूछ रहा है सबसे रावण , कौन धनुर्धर है तुममे
जिसका संयम राम के जैसा , जो बध कर सकता है मुझको
दंभ और छल कपट हीन , कोई है धरती पर पुरूष श्रेष्ठ
जिसकी मर्यादा राम के जैसा , जो बध कर सकता है मुझको
सच्चरित्र का धनी कौन है, जो न कभी देखा पर नारी
कौन है पत्नी भक्त राम सा, जो बध कर सकता है मुझको
एक रसिक कितनों से बोले , रावण भी मर्यादित है
बनकर लखन ज्ञान कुछ सीखो , बुला रहा रावण तुझको
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मिले ना पनाह कतहु घरवा बहरिया
छोड़ीके परइले कान्हा कवनी शहरिया
बंशिया बजाके हमनी के भरमवले
चितवा चोराके कान्हा किरिया धरवले
किरिया धरवले
छूटी ना साथ केतनो घेरीहें बदरिया।।
छोड़ीके परइले कान्हा कवनी शहरिया।।
पगली के रूप सभ सखियन के भइल बा
चानी प के तेल देख चुरूआ में धइल बा
चुरूआ में धइल बा
अँखिया के काजर अब बुझात नइखे करिया ।।
छोड़ीके परइले कान्हा कवनी शहरिया ।।
गइया उदास बिया उदास बा बछरूआ
मोरनी रोवेले मोर लागत बाटे उरूआ
लागत बाटे उरूआ
तड़पे तलैया बिच जल के मछरिया ।।
छोड़ीके परइले कान्हा कवनी शहरिया ।।
रसगर बात नइखे निकलत मुह से
रसिको मउराइल बाड़े कान्हा के बिछोह से
कान्हा के बिछोह से
मन करे डाल लीहीं गर में फंसरिया ।।
छोड़ीके परइले कान्हा कवनी शहरिया ।।
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जिनिगी जंग ना ह जे जीतल जाव
जिनिगी पतंग ना ह जे खिंचल जाव
जिनिगी त दरिया के बहत पानी ह
एह से सुनर समाज के सिंचल जाव
सुख दुख के ऊँचा खाला से ना रूकेला
आफत के ताप से जिनिगी ना सूखेला
रसिक पो भरोसा रखऽ गलत ना बतइहें
जिनिगी तऽ बाँस ह नववला पो ना टूटेला
आपन अनकर के भेद मिटाव
सभ केहु के अपने सवांग बताव
ढ़ेला फेंकेवाला के हाँथ दुखा जाई
सभ लो के अपना करेजा में सटाव
अनघा बिटोरला के का जरूरत बा
आँख तरेरला के का जरूरत बा
सभ काम मीठ बोलले से होता त
जहर घोरला के का जरूरत बा
फूल खिलने दे अड़ंगा मत डाल
ऐ जिन्दगी ! तू अपनी आदत बदल ले
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लागल बा करेजवा में , बोलिया के बान
शान कइसे रही
अखड़ेरे होता जिनिगी जियान
शान कइसे रही
रोज रोज ओज क के बोलत रह बतिया
आज केकरा फेरा में तु परल संघतिया
परल संघतिया
घोर माठा कय दिहल , सानलऽ पिसान शान कइसे रही ।।
अखड़ेरे होता जिनिगी जियान
शान कइसे रही ।।
हँसी हँसी बोलेनी त बोलत रह प्यार से
तनि कोहनइनी त फोरेल कपार के
फारेल कपार के
किरिया तु खइले रह , करब ना गुमान
शान कइसे रही ।।
अखड़ेरे होता जिनिगी जियान
शान कइसे रही ।।
कवना सवतिया के सेज गरमावेलऽ
पुछीना त हमरा के खाहें भरमावेलऽ
काहें भरमावेलऽ
हीरा के खजाना छोड़ी , कोइला देल जान
शान कइसे रही ।।
अखड़ेरे होता जिनिगी जियान
शान कइसे रही ।।
आव आव रसिक बाबा तु ही समझाव
पियवा के तनि निमन रहिया देखाव
रहिया देखाव
दुअरा पो सुतल बा चदरिया के तान
शान कइसे रही।।
अखड़ेरे होता जिनिगी जियान
शान कइसे रही ।
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काहें तु डेराल सैंया बिटिया के अइला से ।।
काम नाहीं चली अइसे छोड़के परइला से ।।
बिटिया के पीरा हमरो कम नइखे बेटा से
जइब दुरदुरावल जब हट जइब हेठा से
हट जइब हेठा से
मिली ना पतोहिया कवनो महल बनइला से ।।
काम नाहीं चली अइसे छोड़के परइला से ।।
देखऽ सरकार तोहरा पीछे पीछे धावता
बिटिया के बढ़े खातिर मंतर बतावता
मंतर बतावता
बढ़ जाता इज्जत सैंया बेटी के पढइला से ।।
काम नाहीं चली अइसे छोड़के परइला से।।
चानी पो के बार जहिया तोहरो नोचाई
ओही दिन धीयरी के इयाद तोहरो आई
इयाद तोहरो आई
बबुआ बेलावत बाड़े ठठरी सुखइला से ।।
काम नाहीं चली अइसे छोड़के परइला से ।।
रसिक बाबा कहतारे जिनिगी के राज हो
काल मेड़राता जागऽ नयका समाज हो
नयका समाज हो
सगरो आन्हार होई दीयरी बुझइला से ।।
काम नाहीं चली अइसे छोड़के परइला से ।।
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एतना बचन तुहु दीह ए बाबा
आहे बाबा बेटी हई
कुलवा के जोत
अलोत जन करीह ए बाबा
आहे बाबा बेटी हई
कुलवा के जोत
अलोत जन करीह ए बाबा
एतना बचन तुहु दीह ए पापा
आहे पापा बेटी हई घर के सिंगार
तु रार जन करीह ए पापा
आहे पापा बेटी हई घर के सिंगार
तु रार जन करीह ए पापा
एतना बचन तुहु दीह ए भईया
आहे भईया बेटी हई
आंगना चिरइया परइया
जन करीह ए भईया
आहे भईया बेटी हई
आंगन के चिरइया परइया
जन करीह ए भईया
आठावा बचन तुहु दीह ए दुलहा
आहे दुलहा बेटी हई माई के परान
जिआन जन करीह ए दुलहा
आहे दुलहा बेटी हई माई के परान
जिआन जन करीह ए दुलहा
एतना बचन तुहु दीह रसिक बाबा
आहे बाबा लिखीह कलमिया के धार
गोहार रोज करीह ए बाबा
आहे बाबा लिखीह कलमिया के धार
गोहार रोज करीह ए बाबा
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