रोवला के उ मोल ना जनलस भोंकलस पीठ में छूरा
अँतड़ी सटल त दाँत चिहरनी मरलस पेट में हूरा
रसिक के रोंवा कलपता अनेत बा अब बरदास के बाहर
संउसे माल बिटोर के छंवड़ा बाप के फेंकलस घूरा
अँतड़ी सटल त दाँत चिहरनी मरलस पेट में हूरा
रसिक के रोंवा कलपता अनेत बा अब बरदास के बाहर
संउसे माल बिटोर के छंवड़ा बाप के फेंकलस घूरा
चेट गरम त मीत बा सभे
खाली पेट बा दूरी
हीत मीत सभ प्रीत करेला
रखले दिल से दूरी
जहिया आफत आई तन पो
सभे भाग पराई
समय के बदलत चाल रसिक बा
मन में रखऽ सबूरी
खाली पेट बा दूरी
हीत मीत सभ प्रीत करेला
रखले दिल से दूरी
जहिया आफत आई तन पो
सभे भाग पराई
समय के बदलत चाल रसिक बा
मन में रखऽ सबूरी
छोड़ला से ना छूटी आदत
सजग रहला के काम बा
होश गइल त गलती होई
कइल धइल नकाम बा
मन के भाव से घाव न दीह
सभे केहु अपने बा
बाबा रसिक बतावत बाड़े
जिनिगी के पैगाम बा
सजग रहला के काम बा
होश गइल त गलती होई
कइल धइल नकाम बा
मन के भाव से घाव न दीह
सभे केहु अपने बा
बाबा रसिक बतावत बाड़े
जिनिगी के पैगाम बा
~ रसिक ~
एक माई के चार गो बेटा , चारो बा अधिकारी
माई कोना में परल बड़ी जइसे माल सरकारी
रख रखाव के चिंता नइखे सड़ी त आमद बढ़ी
जीवन बिमा के पइसा पो सभे नजर उतारी
माई कोना में परल बड़ी जइसे माल सरकारी
रख रखाव के चिंता नइखे सड़ी त आमद बढ़ी
जीवन बिमा के पइसा पो सभे नजर उतारी
भाई भाई में प्रेम कहाँ बा आपन आपन चेतता
पलखत पा के बाप के पईसा दुनो हाथ समेटता
सेवा के जब बेरा आइल माई बाप के कुदी लागल
रात दिन कइलन जेकराला उहे आज अंगेजता
पलखत पा के बाप के पईसा दुनो हाथ समेटता
सेवा के जब बेरा आइल माई बाप के कुदी लागल
रात दिन कइलन जेकराला उहे आज अंगेजता
दऊरत आइल बिटिया सुनलस बाबूजी के गाथा
चारो भाई के करनी सुनके पीटे लागल माथा
कहलस हमरा कुछ ना चाहीं सेवा खाली करब
बाबूजी के बरद हाथ के माथ पो अपना धरब
चारो भाई के करनी सुनके पीटे लागल माथा
कहलस हमरा कुछ ना चाहीं सेवा खाली करब
बाबूजी के बरद हाथ के माथ पो अपना धरब
रसिक सुनावस उनका के जे बाप माई के फिंचत बा
दिल के आह कलम से कहे गलती नाहीं हकीकत बा
छोड़ अब लतियावल बाबू तोहरो दुगो बाड़ेसन
जेकरा खाली बेटी बाड़ी समझीं उनकर गनिमत बा
~ कन्हैया प्रसाद रसिक ~
दिल के आह कलम से कहे गलती नाहीं हकीकत बा
छोड़ अब लतियावल बाबू तोहरो दुगो बाड़ेसन
जेकरा खाली बेटी बाड़ी समझीं उनकर गनिमत बा
~ कन्हैया प्रसाद रसिक ~
खांखर भइल बा पांजर ना जान बा ना परान बा
बाकि एह टूटही कलमिया में विचार के खान बा
जहाँ ना जाले रवि ऊहाँ इ झट से के चहुप जाला
भले लो भुला जा बाकि एही में भोजपुरिया शान बा
बाकि एह टूटही कलमिया में विचार के खान बा
जहाँ ना जाले रवि ऊहाँ इ झट से के चहुप जाला
भले लो भुला जा बाकि एही में भोजपुरिया शान बा
ए बाबा बुढ़ऊती में हरे नइखे चलेके
जे फटफटाता उनका जरे नइखे चलेके
रसिक के त मन बा दुअरिका दउरत रहस
अपने पलानी में मस्त केहुके घरे नइखे चलेके
जे फटफटाता उनका जरे नइखे चलेके
रसिक के त मन बा दुअरिका दउरत रहस
अपने पलानी में मस्त केहुके घरे नइखे चलेके
तूफान त मन में चलता वेग अभी कम नइखे
पतई पियराइल बाकि हवा के रूख नम नइखे
गिरल नइखे शाख से तनि-मनि रसगर बा
कुइया के पानी पताल धइले बा आ रसिक के रसरी में दम नइखे
पतई पियराइल बाकि हवा के रूख नम नइखे
गिरल नइखे शाख से तनि-मनि रसगर बा
कुइया के पानी पताल धइले बा आ रसिक के रसरी में दम नइखे
~कन्हैया प्रसाद रसिक ~
बात कहल साँच बा
कि रूपेया में आँच बा
जेकरा पार रूपेया नइखे
समझीं कि उ काँच बा
बुद्धि के बटलोही चाहे
हेखे केहु टुइयाँ
रूपेया नइखे पास त
सभे बइठल बाटे भुइयाँ
रूपेया बा त खरकटहा भी
आपन तन के अंइठता
हिन रूपेया के बाट बटोही
उजबुक घरे पइठता
~ रसिक ~
कि रूपेया में आँच बा
जेकरा पार रूपेया नइखे
समझीं कि उ काँच बा
बुद्धि के बटलोही चाहे
हेखे केहु टुइयाँ
रूपेया नइखे पास त
सभे बइठल बाटे भुइयाँ
रूपेया बा त खरकटहा भी
आपन तन के अंइठता
हिन रूपेया के बाट बटोही
उजबुक घरे पइठता
~ रसिक ~
जब अपने लोगवा दोषी बा
त दोसरा में का दोष बताई
आपन घर में काँट बिछाके
आन के घर कइसे सुख पाई
दु दिन के मेहमान बा सभे
अपना के अपनावल करऽ
आपन बोली बोल के भईया
मन के भरम मिटावल करऽ
सभके माई सुखिया बाड़ी
गोड़ छुवेल दाँत चिहार के
आपन माई के करऽ सुआगत
राख लाज बिहार के
मुह फेरला से काम ना चली
आवे के परी मैदान में
श्रेष्ठ बा सगरो बबुआ बचवा
जामल भोजपुरिया खानदान में
गाड़ के रखले खूटा सगरी
रसिक अपना जवानी में
रत्ती भर भी दोष ना बाटे
एह भोजपुरिया पानी में
~ कन्हैया प्रसाद रसिक ~
त दोसरा में का दोष बताई
आपन घर में काँट बिछाके
आन के घर कइसे सुख पाई
दु दिन के मेहमान बा सभे
अपना के अपनावल करऽ
आपन बोली बोल के भईया
मन के भरम मिटावल करऽ
सभके माई सुखिया बाड़ी
गोड़ छुवेल दाँत चिहार के
आपन माई के करऽ सुआगत
राख लाज बिहार के
मुह फेरला से काम ना चली
आवे के परी मैदान में
श्रेष्ठ बा सगरो बबुआ बचवा
जामल भोजपुरिया खानदान में
गाड़ के रखले खूटा सगरी
रसिक अपना जवानी में
रत्ती भर भी दोष ना बाटे
एह भोजपुरिया पानी में
~ कन्हैया प्रसाद रसिक ~
बा कुआँ में भांग घोराइल मन सभके बउराइल
मुह छुपाके घुमस कन्हैया ना सोपट केहु भेंटाइल
सभ केहुके अलगे शान बा सिर पो ताज बा लागल
मार ठहाका लोग कहेला रसिकवा बा पगलाइल
मुह छुपाके घुमस कन्हैया ना सोपट केहु भेंटाइल
सभ केहुके अलगे शान बा सिर पो ताज बा लागल
मार ठहाका लोग कहेला रसिकवा बा पगलाइल
साँच के आँच जे सहेला उ पकठा जाला
ए रसिक झूठ के एसी बेसी दिन ना चलेला
ए रसिक झूठ के एसी बेसी दिन ना चलेला
~ रसिक ~
लोगन के झुकावत झुकावत
ना जाने कब काठ हो गइनी
बोले के सहूर ना भइल तले
ना जाने कब झरनाठ हो गइनी
ना जाने कब काठ हो गइनी
बोले के सहूर ना भइल तले
ना जाने कब झरनाठ हो गइनी
अभी मन के कुहेस नइखे फाटल
उपर उपर पपड़ी पड़ल , नीचे आग धधकत बा
उपर उपर पपड़ी पड़ल , नीचे आग धधकत बा
जियत जिनिगी नफरत के नस्तर लोग चलावत रहे
मुआला के बाद लोग रसिक के महान कहे लागल
मुआला के बाद लोग रसिक के महान कहे लागल
रसिक
अईसे काहें देखेलु तु अँखिया के कोर से
हमरा के कहे लोग मछरी के काँट ह
कतनो भगवला पो भागी ना दुआर से इ
हमरा के कहे लोग रोड प के चाँट ह
कई बेर रचके थुराइल बानी थोक में
लोगवा कहेला कइसे खाड़ बा रसिकवा
रहिया में खाड़ होके बड़ बढ़ बोलिला त
हमरा के कहे लोग जनमे के भाट ह ।
हमरा के कहे लोग मछरी के काँट ह
कतनो भगवला पो भागी ना दुआर से इ
हमरा के कहे लोग रोड प के चाँट ह
कई बेर रचके थुराइल बानी थोक में
लोगवा कहेला कइसे खाड़ बा रसिकवा
रहिया में खाड़ होके बड़ बढ़ बोलिला त
हमरा के कहे लोग जनमे के भाट ह ।
रसिक
आव गला मिलके हमनी के नफरत मिटावल जाव
जे हट गइल बा ओकरा के पंजरा सटावल जाव
बहुत हो गइल हमार तोहार मुह फुलउअल
आव जात पाँत आ मज़हब के दीवार गिरावल जाव
रसिक रिसिया के केहु से ना बोलले बाड़न कबहु
आव रसिक के रस में डूबकी लगावल जाव।
जे हट गइल बा ओकरा के पंजरा सटावल जाव
बहुत हो गइल हमार तोहार मुह फुलउअल
आव जात पाँत आ मज़हब के दीवार गिरावल जाव
रसिक रिसिया के केहु से ना बोलले बाड़न कबहु
आव रसिक के रस में डूबकी लगावल जाव।
~ कन्हैया प्रसाद रसिक ~
लोगवा बाटे स्वार्थी, झुक जाला तत्काल
सिर पो जब लाठी बजे , करिया होला भाल
करिया होला भाल , चाल ना केहु सुधारे
आफत पड़ते चोर , शिवाला डेरा डारे
रसिक बतावस राह , स्वार्थ के छोड़ऽ रोगवा
मन से करब प्रणाम , प्यार पथ चली लोगवा
~ रसिक ~
सिर पो जब लाठी बजे , करिया होला भाल
करिया होला भाल , चाल ना केहु सुधारे
आफत पड़ते चोर , शिवाला डेरा डारे
रसिक बतावस राह , स्वार्थ के छोड़ऽ रोगवा
मन से करब प्रणाम , प्यार पथ चली लोगवा
~ रसिक ~
मन करतारे खायेके आचार रजउ
जाके ला दीह संझिया बाजार रजउ
जाके ला दीह संझिया बाजार रजउ
जीभ लपलपाता देख अरूवी के पात हो
कइसे बनी गिलवछ सैंया नइखे बुझात हो
करेला करैला तकरार रजउ ।।
मन करतारे खायेके आचार रजउ
जाके ला दीह संझिया बाजार रजउ।।
कइसे बनी गिलवछ सैंया नइखे बुझात हो
करेला करैला तकरार रजउ ।।
मन करतारे खायेके आचार रजउ
जाके ला दीह संझिया बाजार रजउ।।
कटहर के कोआ नइखे निक लागत खाये में
डर लागे सैंयाजी अकेले कहीं जाये में
बइठल बडुए कोंहड़ा पहरदार रजउ।।
मन करतारे खायेके आचार रजउ
जाके ला दीह संझिया बाजार रजउ।।
डर लागे सैंयाजी अकेले कहीं जाये में
बइठल बडुए कोंहड़ा पहरदार रजउ।।
मन करतारे खायेके आचार रजउ
जाके ला दीह संझिया बाजार रजउ।।
रसिक बाबा रोज रोज चटनी चटावेले
आधा घंटा आके रोज रोज बतियावेले
भिंडी देखी घुमता कपार रजउ। ।
मन करतारे खायेके आचार रजउ
जाके ला दीह संझिया बाजार रजउ।।
आधा घंटा आके रोज रोज बतियावेले
भिंडी देखी घुमता कपार रजउ। ।
मन करतारे खायेके आचार रजउ
जाके ला दीह संझिया बाजार रजउ।।
जल्दी जल्दी जाके सैंया हाट से ले आव
हमरा के चटक मटक रोज तु खियाव
ना त चुवे लागी बबुआ के लार रजउ ।।
मन करतारे खायेके आचार रजउ
जाके ला दीह संझिया बाजार रजउ।।
हमरा के चटक मटक रोज तु खियाव
ना त चुवे लागी बबुआ के लार रजउ ।।
मन करतारे खायेके आचार रजउ
जाके ला दीह संझिया बाजार रजउ।।
रसिक
फेसबुकिया रोग
************
जब से हमरा फेसबुकिया रोग लागल बा
तब से जिनिगी तबाह हो गइल बा
पुरा सुनला पो भी आधभेसरे बुझाता
एक दिन के बात ह
मलकिनी कहली
ए जी तनी !
कुकरवा चार गो सीटी मार दी
त बंद क देब
हम छत पो कपड़ा पसारे ज तानी
हमरा बंद क देब
ओसहीं सुनाइल जइसे
द्रोणाचार्य के,
" अश्वत्थामा नाम नरो •••••••• "
सुनाइल रहे
ओह घरी कृष्ण के शंख बाजल रहे
आ "बंद क देब" के पहिले
पोरफाइल के पतरा देखत रहीं
फटाफट मोबाईल हाथ में पकड़ले
आ पोरफाइल पो नजर अटकवले
घर में घूम घूम देखे लगनी
कवन चीज खुलल बा
जेकरा के बंद करेके
मलकिनी कहले बाड़ी
मने मने अगरात रहीं कि
आज मलकिनी के मोका ना मिली
हमरा में छीब काटेके
ना त कतनो निमन काम क दीं
छीब काटे के उनकर आदत रहे
पुरा घर छान मरनी
कवनो चीज खुला ना मिलल
या त ढ़कल रहे भा बंद रहे
हमरा आँखी के सोझा
कुकर चिचिआत रहे
हमरा से कहत रहे
अरे बुड़बक!
हम ही खुला बानी
जल्दी से बंद कर
ना त बकोटा जइबे
बाकि हमरा
कुकर के आवाज
ना सुनाइल
तले देखतिनी
मलकिनीया दउरल आवत बिया
हम पुछ देनी
का खुला बा
जेकरा के बन करेके कहले रहलु
तले उकहलस
तनि आपन मोबाइल दीं त
हम जननी कि
अपना नइहर से
बतियावे खातिर
मोबाईल मांगतिया
बाकि इ का
मोबाइल के त
पटकउआ मोड में चल गइल
बेचारा मोबाईल
आपन बोटी बोटी तुरवा के
टुकुर टुकुर ताकत रहे
आ हमरा के ललकारत रहे
मालिक! आपन मरदानगी दिखाईं
आ दुचार झाप मलकिनी के लगाईं
ललकार सुनके
हमार हाथ त उठल
बाकि तेवर देखते जुड़ गइल
अवरू कुछ पुछे से पहिलहीं
जबाब मिल गइल
इहे खुला रहे हम बन क देनी
आ एफ एम रेडियो शुरू हो गइल
इ मोबाइल ना हमार सौत हिअ
जब देखीं त एही में
लपटाईल रहतानी
जइसे घर में अवरू केहु
हइले नइखे।
हम चुप चाप टुकौर टुकुर
ताकत रहीं कबो मोबाईल के
त कबो मलकिनी के
बात सब समझ में आ गइल
सभ गजटेडई
गोबर में गड़ा गइल
पुरे घर में पता ना चलल कि
दिल जरला के गंध बा कि दाल
चुपचाप रसोई में जाके
कुकर खोलनी त भक मार देलस
पते ना चलल कि एह में
दाल बनत रहे
बिना कहले लाग गइनी
एक घंटा रगड़े में हाथ चढ़ गइल
आज हमार
फौजी वाला हिम्मत के
भरम टूट गइल
फिर से कुकर में दाल रखके
देखावे गइनी
एतना दाल ठीक नु बा
अइसे पुछनी जइसे
जंग के युद्ध बंदी होखीं
जबाब मिलल
सोझा से हटीं ना त••••
समझ गइनी
आज सबहरिये एकादशी व्रत बा
बाकि हम त व्रत ना करेनी
आ हिम्मत नइखे कि
बाजार जाके कुछ खालीं
सभके से निहोरा बा
चार गो समोसा भेजवा दीं हाली
केहुके लागत होखे
कि हमरा के
पढ़े बिना मन ना लागता
त एगो चालिस हजार वाला
हलुक फलुक मोबाइलो
भेजवा दीं
कहें से कि एक महिना
हमरा हिम्मत के
यथास्थान आवे में लाग जाई
तले विदा लेत बाड़े
बाबा रसिक कन्हाई
~ कन्हैया प्रसाद रसिक ~
************
जब से हमरा फेसबुकिया रोग लागल बा
तब से जिनिगी तबाह हो गइल बा
पुरा सुनला पो भी आधभेसरे बुझाता
एक दिन के बात ह
मलकिनी कहली
ए जी तनी !
कुकरवा चार गो सीटी मार दी
त बंद क देब
हम छत पो कपड़ा पसारे ज तानी
हमरा बंद क देब
ओसहीं सुनाइल जइसे
द्रोणाचार्य के,
" अश्वत्थामा नाम नरो •••••••• "
सुनाइल रहे
ओह घरी कृष्ण के शंख बाजल रहे
आ "बंद क देब" के पहिले
पोरफाइल के पतरा देखत रहीं
फटाफट मोबाईल हाथ में पकड़ले
आ पोरफाइल पो नजर अटकवले
घर में घूम घूम देखे लगनी
कवन चीज खुलल बा
जेकरा के बंद करेके
मलकिनी कहले बाड़ी
मने मने अगरात रहीं कि
आज मलकिनी के मोका ना मिली
हमरा में छीब काटेके
ना त कतनो निमन काम क दीं
छीब काटे के उनकर आदत रहे
पुरा घर छान मरनी
कवनो चीज खुला ना मिलल
या त ढ़कल रहे भा बंद रहे
हमरा आँखी के सोझा
कुकर चिचिआत रहे
हमरा से कहत रहे
अरे बुड़बक!
हम ही खुला बानी
जल्दी से बंद कर
ना त बकोटा जइबे
बाकि हमरा
कुकर के आवाज
ना सुनाइल
तले देखतिनी
मलकिनीया दउरल आवत बिया
हम पुछ देनी
का खुला बा
जेकरा के बन करेके कहले रहलु
तले उकहलस
तनि आपन मोबाइल दीं त
हम जननी कि
अपना नइहर से
बतियावे खातिर
मोबाईल मांगतिया
बाकि इ का
मोबाइल के त
पटकउआ मोड में चल गइल
बेचारा मोबाईल
आपन बोटी बोटी तुरवा के
टुकुर टुकुर ताकत रहे
आ हमरा के ललकारत रहे
मालिक! आपन मरदानगी दिखाईं
आ दुचार झाप मलकिनी के लगाईं
ललकार सुनके
हमार हाथ त उठल
बाकि तेवर देखते जुड़ गइल
अवरू कुछ पुछे से पहिलहीं
जबाब मिल गइल
इहे खुला रहे हम बन क देनी
आ एफ एम रेडियो शुरू हो गइल
इ मोबाइल ना हमार सौत हिअ
जब देखीं त एही में
लपटाईल रहतानी
जइसे घर में अवरू केहु
हइले नइखे।
हम चुप चाप टुकौर टुकुर
ताकत रहीं कबो मोबाईल के
त कबो मलकिनी के
बात सब समझ में आ गइल
सभ गजटेडई
गोबर में गड़ा गइल
पुरे घर में पता ना चलल कि
दिल जरला के गंध बा कि दाल
चुपचाप रसोई में जाके
कुकर खोलनी त भक मार देलस
पते ना चलल कि एह में
दाल बनत रहे
बिना कहले लाग गइनी
एक घंटा रगड़े में हाथ चढ़ गइल
आज हमार
फौजी वाला हिम्मत के
भरम टूट गइल
फिर से कुकर में दाल रखके
देखावे गइनी
एतना दाल ठीक नु बा
अइसे पुछनी जइसे
जंग के युद्ध बंदी होखीं
जबाब मिलल
सोझा से हटीं ना त••••
समझ गइनी
आज सबहरिये एकादशी व्रत बा
बाकि हम त व्रत ना करेनी
आ हिम्मत नइखे कि
बाजार जाके कुछ खालीं
सभके से निहोरा बा
चार गो समोसा भेजवा दीं हाली
केहुके लागत होखे
कि हमरा के
पढ़े बिना मन ना लागता
त एगो चालिस हजार वाला
हलुक फलुक मोबाइलो
भेजवा दीं
कहें से कि एक महिना
हमरा हिम्मत के
यथास्थान आवे में लाग जाई
तले विदा लेत बाड़े
बाबा रसिक कन्हाई
~ कन्हैया प्रसाद रसिक ~
माटी में मिलवलस बबुआ हमरो कमाई के
फेल होके रोवस अब धके आँचर माई के
फेल होके रोवस अब धके आँचर माई के
जबसे किनाइल रहे फोर जी के जियो सेट
बबुआ ना कइले रहन पोथी पतरा से भेंट
आठो पहर खिंचस फोटो मुँहवा बनाई के
फेल होके रोवस अब धके आँचर माई के
बबुआ ना कइले रहन पोथी पतरा से भेंट
आठो पहर खिंचस फोटो मुँहवा बनाई के
फेल होके रोवस अब धके आँचर माई के
समसंग के फोर जी आईल बा बाजार में
कम पईसा लेके देता बनिया उधार में
बबुआ के लत लागल आँख मटकाई के
फेल होके रोवस अब धके आँचर माई के
कम पईसा लेके देता बनिया उधार में
बबुआ के लत लागल आँख मटकाई के
फेल होके रोवस अब धके आँचर माई के
रसिक बाबा लेलऽ तुहुं फोर जी मोबाइल
आईल बा बुढ़उती बदलऽ आपन स्टाईल
खून मत जरावऽ जबरन देखके पढ़ाई के
फेल होके रोवस अब धके आँचर माई के
आईल बा बुढ़उती बदलऽ आपन स्टाईल
खून मत जरावऽ जबरन देखके पढ़ाई के
फेल होके रोवस अब धके आँचर माई के
कन्हैया प्रसाद रसिक
अपना कमिनी से खखरी भी खोआ लागे
मुफुत के माल में मसाला तनि कम बा
भोज में भकोस लेले चालीस गो चपोती
चार दिन ना मिली त कवनो ना गम बा
मुफुत के माल में मसाला तनि कम बा
भोज में भकोस लेले चालीस गो चपोती
चार दिन ना मिली त कवनो ना गम बा
भाव क सम्हारीं त शब्द छूट जात बा
शब्द के सम्हारीं त मन झिंझुआत बा
कइसे सम्हारीं हम कविता प्रवाह के
छोड़के जे हटीं त अँखिया लोरात बा
शब्द के सम्हारीं त मन झिंझुआत बा
कइसे सम्हारीं हम कविता प्रवाह के
छोड़के जे हटीं त अँखिया लोरात बा
रसिक
ए बदरी तु जइह जयपुर ,
पिया हमार भुलाइल बाड़े
गरज तड़प के शोर मचइह
लागे कहीं अझुराइल बाड़े
कहीह घर में बइठल बिया
उनकर बियही बिरहिन बनके
बीत गइल मधुमास इहाँ पो
केकरा से लपटाइल बाड़े
पिया हमार भुलाइल बाड़े
गरज तड़प के शोर मचइह
लागे कहीं अझुराइल बाड़े
कहीह घर में बइठल बिया
उनकर बियही बिरहिन बनके
बीत गइल मधुमास इहाँ पो
केकरा से लपटाइल बाड़े
तन के ताप तुरंग भइल बा
ओह पर जेठ जरावेला
ए बालम तु आजा जल्दी
आषाढ़ आग भड़कावेला
सावन में सगरो बा पानी
टप टप चुवत पलानी बा
भादो भरमावत बा मन के
कुआर देह लसिआवेला
ओह पर जेठ जरावेला
ए बालम तु आजा जल्दी
आषाढ़ आग भड़कावेला
सावन में सगरो बा पानी
टप टप चुवत पलानी बा
भादो भरमावत बा मन के
कुआर देह लसिआवेला
कातिक में जब करीं सफाई
संउसे देह करिया जाला
अगहन में नेवान ना होखे
बीच करेज लगे भाला
संउसे देह करिया जाला
अगहन में नेवान ना होखे
बीच करेज लगे भाला
पूस फूस जस दिन होखेला
हाथ गोड़ रूखराइल बा
ए बालम तोहरा बिन देख
कोंढ़ियो अब मुरझाइल बा
हाथ गोड़ रूखराइल बा
ए बालम तोहरा बिन देख
कोंढ़ियो अब मुरझाइल बा
रतो भर सिहरावन लागे
कतनो ओढ़ीं रजाई
माघ बाघ जस झपटे तन पो
केकरा के गोहराईं
कतनो ओढ़ीं रजाई
माघ बाघ जस झपटे तन पो
केकरा के गोहराईं
अब त घर आ जा फागुन में
ना त तन जर खाक होई
लागी जब बेयार फगुनहा
बाँचल तन नापाक होई
एकरा के धमकी तु मनीह
अंग अंग खिसिआइल बा
आ जा ना त एह फागुन में
ठोहर देहिया भाप होई
ना त तन जर खाक होई
लागी जब बेयार फगुनहा
बाँचल तन नापाक होई
एकरा के धमकी तु मनीह
अंग अंग खिसिआइल बा
आ जा ना त एह फागुन में
ठोहर देहिया भाप होई
बिरह आग में धधकत सुनके
धइले धधाइल गाड़ी
सजनी के ओरहन पर कहले
अब ना बनब अनाड़ी
तोहरे खातिर करम कमाई
तु अब मत मुरझइह
बाबा रसिक बतवले बाड़े
उहे राह अपनइह
धइले धधाइल गाड़ी
सजनी के ओरहन पर कहले
अब ना बनब अनाड़ी
तोहरे खातिर करम कमाई
तु अब मत मुरझइह
बाबा रसिक बतवले बाड़े
उहे राह अपनइह
चइत में चकला बेलना लेके
साथे साथ चहकल जाई
तु सेवकाई करीह घर में
हम बाहर में करब कमाई
साथे साथ चहकल जाई
तु सेवकाई करीह घर में
हम बाहर में करब कमाई
बैसाख में बारहमासा पुरा
ताल छंद लय लगे अधूरा
सजनी से साजन मिल गइले
खास कन्हैया भांग धतूरा
ताल छंद लय लगे अधूरा
सजनी से साजन मिल गइले
खास कन्हैया भांग धतूरा
रसिक
खाड़ बानी उनके दुअरिया पो
टकटकी बा उनके नजरिया पो
टकटकी बा उनके नजरिया पो
केहु कहे लिख लिख
केहु कहे निमन लिख
हम कहीना उपर वाला
हमरा से लिखवावेला
केहु कहे निमन लिख
हम कहीना उपर वाला
हमरा से लिखवावेला
चादर तान के सुतल रहनी घोड़ा रहे बेचाइल
अचके में संदेशा ओकर हमरा मगज में आइल
करवट फेरके महटियाईं त
मेहना मार जगावेला ।।
हम कहीना उपर वाला
हमरा से लिखवावेला ।।
अचके में संदेशा ओकर हमरा मगज में आइल
करवट फेरके महटियाईं त
मेहना मार जगावेला ।।
हम कहीना उपर वाला
हमरा से लिखवावेला ।।
अक्षर ज्ञान से रसिक अधूरा
कबो ना लिखल होखे पूरा
राह में रोड़ा आवेला त
उहे राह देखावेला ।।
हम कहीना उपर वाला
हमरा से लिखवावेला
कबो ना लिखल होखे पूरा
राह में रोड़ा आवेला त
उहे राह देखावेला ।।
हम कहीना उपर वाला
हमरा से लिखवावेला
लिखत लिखत शब्द ओराला
मन में पश्चाताप घोराला
शब्द पिटारा खोलके उहे
नया शब्द बतलावेला ।।
हम कहीना उपर वाला
हमरा से लिखवावेला
मन में पश्चाताप घोराला
शब्द पिटारा खोलके उहे
नया शब्द बतलावेला ।।
हम कहीना उपर वाला
हमरा से लिखवावेला
बुढ़वा बानर नइखे छोड़त गुलाटी मारल
सउओ सभे कबो ना छोड़ीं थपरी पारल
जिनिगी रही जवान जान के देखत रहीह
रसिक बनावस मौज से कबो ना हारल
सउओ सभे कबो ना छोड़ीं थपरी पारल
जिनिगी रही जवान जान के देखत रहीह
रसिक बनावस मौज से कबो ना हारल
~ रसिक ~
छोड़त करेजा के करेजवा में हूक उठे
काढ़ के करेजा मोर , करेजा चल गइली
रसिक के रस के गगरी ढ़रक गइल
निरस बनाइके , करेजा चल गइली
कुहुके ले रात दिन तरसेले पानी बिन
बरगद के छाँह के , तरकुल बनवली
बेटी के परेम के कबो ना भुलाई बाप
अंगुरी छोड़ाइके , करेजा चल गइली
काढ़ के करेजा मोर , करेजा चल गइली
रसिक के रस के गगरी ढ़रक गइल
निरस बनाइके , करेजा चल गइली
कुहुके ले रात दिन तरसेले पानी बिन
बरगद के छाँह के , तरकुल बनवली
बेटी के परेम के कबो ना भुलाई बाप
अंगुरी छोड़ाइके , करेजा चल गइली
~ रसिक ~
काँच गगरी के पीट के पटावेला
उ कोंहरा कादो खिंच के सटावेला
बंद क देला चौमुहानी के सभ रहिया
आ अंगुरी के इशारा से पास में बोलावेला
उ कोंहरा कादो खिंच के सटावेला
बंद क देला चौमुहानी के सभ रहिया
आ अंगुरी के इशारा से पास में बोलावेला
गढ़के भेजले बा नमूना
लोगवा लगवले बा चूना
पाकल बेहुंड़ी फूट गइल
जब कहे लोगवा मैं हूँ ना
लोगवा लगवले बा चूना
पाकल बेहुंड़ी फूट गइल
जब कहे लोगवा मैं हूँ ना
गिरत पतई नाच दिखावे
कहे कि गम मत करऽ
जनम के बेरा थरिया बाजल
अब जश्न ना मोन्हा धरऽ
छितराइल बा छंवड़ा छवंड़ी
माई बाप मेहराइल बाड़े
रसिक के रग में बा सुरहुरी
प्रेम के रसरी बरऽ
कहे कि गम मत करऽ
जनम के बेरा थरिया बाजल
अब जश्न ना मोन्हा धरऽ
छितराइल बा छंवड़ा छवंड़ी
माई बाप मेहराइल बाड़े
रसिक के रग में बा सुरहुरी
प्रेम के रसरी बरऽ
जे,
चमचन के चक्कर में आई
ओकर हम परबत चढ़ जाई
फिर त कवनो राह ना सूऽझी
इक दिन गुडुही अपने जाई
चमचन के चक्कर में आई
ओकर हम परबत चढ़ जाई
फिर त कवनो राह ना सूऽझी
इक दिन गुडुही अपने जाई
~ रसिक ~
सभ कुछ रह गइल इहँवे तंवाइल बा
देखऽ सुगनवा सभ छोड़के पराइल बा
देखऽ सुगनवा सभ छोड़के पराइल बा
पाई पाई नेह छोह रखनी संगोर के
कइनी सुवागत हम जिनिगी में भोर के
अब काहें लोगवा में मन अझुराइल बा ।।
देखऽ सुगनवा सभ छोड़के पराइल बा ।।
कइनी सुवागत हम जिनिगी में भोर के
अब काहें लोगवा में मन अझुराइल बा ।।
देखऽ सुगनवा सभ छोड़के पराइल बा ।।
माया के बजरिया के करके कगरिया
चल ए मन अब पियावा नगरिया
राम राम रटले में फयदा बुझाइल बा ।।
देखऽ सुगनवा सभ छोड़के पराइल बा ।।
चल ए मन अब पियावा नगरिया
राम राम रटले में फयदा बुझाइल बा ।।
देखऽ सुगनवा सभ छोड़के पराइल बा ।।
रसिक रोवाव जन चार दिन ठहर जा
दुअरिका के संगे तनि घूम ल शहर जा
अब ना बहाना चली पलकी सजाइल बा ।।
देखऽ सुगनवा सभ छोड़के पराइल बा ।।
दुअरिका के संगे तनि घूम ल शहर जा
अब ना बहाना चली पलकी सजाइल बा ।।
देखऽ सुगनवा सभ छोड़के पराइल बा ।।
~ रसिक ~
जनम भईल घर में आ बाजल रहे थरिया
लोग कहे बबुआ बाटे कान्हा जस करिया
का फरक पड़े ला चेहारवा के रंग से
बबुआ बाटे खांटी जवान भोजपुरिया
लोग कहे बबुआ बाटे कान्हा जस करिया
का फरक पड़े ला चेहारवा के रंग से
बबुआ बाटे खांटी जवान भोजपुरिया
बोले बतियावे में लाजो ना लागेला
लोगन के बीच में भोजपुरिये भाखेला
ना हुटहुटाला इ बोले में भोजपुरी के
माटी के मान के इयाद सदा राखेला
लोगन के बीच में भोजपुरिये भाखेला
ना हुटहुटाला इ बोले में भोजपुरी के
माटी के मान के इयाद सदा राखेला
लोग कहे रसिक, धारा रस के बहावेला
अनका के देखते हीं आपन बनावेला
कहें अझुराइल बाड़ आपस में भाई हो
रहे खातिर प्रेम से रहिया देखावेला
~ रसिक ~
अनका के देखते हीं आपन बनावेला
कहें अझुराइल बाड़ आपस में भाई हो
रहे खातिर प्रेम से रहिया देखावेला
~ रसिक ~
केहु नइखे छिनले बाकि छिना गइल बा
लउकत बा सोगहग बाकि मउरा गइल बा
अभी लागल बा जरोह से पियर होके
कहियो टप से टपक जाई पाझा गइल बा
लउकत बा सोगहग बाकि मउरा गइल बा
अभी लागल बा जरोह से पियर होके
कहियो टप से टपक जाई पाझा गइल बा
सांच केहु ना बताई सभे चेहरा पो चेहरा लगवले बा
किरिन कइसे लउकी सभे विस्तर पो महटिअवले बा
आपन सवारथ खातिर भाई भाई के खोंता उजारऽता
रसिक हो प्यार कहिके नोह से नश्तर चलवले बा
किरिन कइसे लउकी सभे विस्तर पो महटिअवले बा
आपन सवारथ खातिर भाई भाई के खोंता उजारऽता
रसिक हो प्यार कहिके नोह से नश्तर चलवले बा
~ रसिक ~
लाईक होता पोस्ट से नादारत
कवनो टोना कइलस
भोरे भोरे होता माहाभारत
कवनो टोना कइलस ||
कवनो टोना कइलस
भोरे भोरे होता माहाभारत
कवनो टोना कइलस ||
बाबा हो तिवारी तनि
पतरा उचारीं
जादू टोना कइले बा जे
कउड़िया से मारीं
बढ़ल जाता मन ओकर
कबो नइखे हारत ||
कवनो टोना कइलस ||
लाईक होता पोस्ट से नादारत
कवनो टोना कइलस ||
पतरा उचारीं
जादू टोना कइले बा जे
कउड़िया से मारीं
बढ़ल जाता मन ओकर
कबो नइखे हारत ||
कवनो टोना कइलस ||
लाईक होता पोस्ट से नादारत
कवनो टोना कइलस ||
नजरी लगवले बा नजरिया मिलाके
मार देला चाकू कादो पेट में समाके
नइखे आवत सोझा खाली
थपरी बा पारत ||
कवनो टोना कइलस ||
लाईक होता पोस्ट से नादारत
कवनो टोना कइलस ||
मार देला चाकू कादो पेट में समाके
नइखे आवत सोझा खाली
थपरी बा पारत ||
कवनो टोना कइलस ||
लाईक होता पोस्ट से नादारत
कवनो टोना कइलस ||
छोड़ ओझा गुनी बाबा रसिक के बोलाव
उनुके से दिल के आपन बतिया बताव
बइठल बा अन्हरिया में
दीया नइखे बारत ||
कवनो टोना कइलस ||
लाईक होता पोस्ट से नादारत
कवनो टोना कइलस ||
उनुके से दिल के आपन बतिया बताव
बइठल बा अन्हरिया में
दीया नइखे बारत ||
कवनो टोना कइलस ||
लाईक होता पोस्ट से नादारत
कवनो टोना कइलस ||
~ रसिक ~
बाकी सब ठीक बा
*********
पिया गइलें परदेश कमाये,घर में बानी अकेली
ना देवर ना ननदी घर बाड़ी नाहीं केहु सहेली
आँख के कोर से लोर गिरेला ससुई पीर ना जाने
पतिया लिखके रसिक से भेजली गतिया हाल बखाने
माई के कपार दुखे , बाबूजी के टंगरिया
हम कदहीन बानी , बाकी सभ ठीक बा
हम कदहीन बानी , बाकी सभ ठीक बा
छत चुवे टप टप , नभ घोंघियाला जब
लउके ला ना छत में दरार बारीक बा ।।बाकि सब ठीक बा ।।
लउके ला ना छत में दरार बारीक बा ।।बाकि सब ठीक बा ।।
बढ़ल बा उधारी त , बनिया तगादा करे
हाँथ बा सकेत अभी , मुँह में ना झींक बा ।।बाकि सब ठीक बा ।।
हाँथ बा सकेत अभी , मुँह में ना झींक बा ।।बाकि सब ठीक बा ।।
गाय बिया बिसुखल , मिलेला ना दही दूध
खाये खाति चोकर के रोज बने लीट बा ।।बाकि सब ठीक बा ।।
खाये खाति चोकर के रोज बने लीट बा ।।बाकि सब ठीक बा ।।
ठेला परल हाथ में , करते करत काम
बात नइखे मानत , छोरा बड़ा ढ़ीठ बा ।।बाकि सब ठीक बा ।।
बात नइखे मानत , छोरा बड़ा ढ़ीठ बा ।।बाकि सब ठीक बा ।।
सांसत में जान बाटे केहुके ना ज्ञान बाटे
छेड़खानी केस में बबुअवो शरीक बा ।।बाकि सब ठीक बा ।।
छेड़खानी केस में बबुअवो शरीक बा ।।बाकि सब ठीक बा ।।
केतना ले हाल कहीं कम लिखीं जादा गहीं
धइल बा चुहानी में खखरी आ सींक बा ।।बाकि सब ठीक बा ।।
धइल बा चुहानी में खखरी आ सींक बा ।।बाकि सब ठीक बा ।।
रसिक के सहारा बाटे पापी पेट भरता
साफ हवें बाबा दिल उनकर नीक बा ।।बाकि सब ठीक बा ।।
साफ हवें बाबा दिल उनकर नीक बा ।।बाकि सब ठीक बा ।।
रसिक
गुरू के टंगरी तुरत बा
माई बाप के थुरत बा
बबुआ भइल बा जवान अब
राह में लइकी घूरत बा
माई बाप के थुरत बा
बबुआ भइल बा जवान अब
राह में लइकी घूरत बा
कबो कबो मुख पूजन होला
चाँटा चप्पल से सूजन होला
तबहुँ आपन चाल ना बदले
रोज बाप के गिंजन होला
चाँटा चप्पल से सूजन होला
तबहुँ आपन चाल ना बदले
रोज बाप के गिंजन होला
रसिक देखके रोवत बाड़े
आपन इज्जत खोवत बाड़े
सभ्य समाज में उठऽ बइठऽ
नया सोंच के जोहत बाड़े
~ रसिक ~
आपन इज्जत खोवत बाड़े
सभ्य समाज में उठऽ बइठऽ
नया सोंच के जोहत बाड़े
~ रसिक ~
काका कागा उचरेला , लागता सनेसा आई
ढ़ेर दिन पर मिली , जिनिगी के संपदा
घरे आई बेटा बहू , नौकरी से छूट्टी लेके
दूर होई बाबूजी के , मनवा से विपदा
दूर होई बाबूजी के , मनवा से विपदा
रसिक के रस मिली , जियरा में फूल खिली
गोद में बईठी जब , नातिन प्रियंवदा
गोद में बईठी जब , नातिन प्रियंवदा
काका के कलम चले , सबसे निहोरा करे
सद्य सद ज्ञान स्व उकेरते रहें सदा
******
सद्य सद ज्ञान स्व उकेरते रहें सदा
******
सदा पास बैठी रहो , कुछ मैं कुछ तू कहो
इक दूजे की निराली , बोलने की हो अदा
इक दूजे की निराली , बोलने की हो अदा
अदा तेरी देखकर , मन रहे काबू में न
दीखती हो गोरी तुम , जैसे लगे मैकदा
दीखती हो गोरी तुम , जैसे लगे मैकदा
मैकदा में जाके मस्त काकाजी कमाल करे
काकी की कमान सदा लगता है लाभदा
काकी की कमान सदा लगता है लाभदा
लाभदा हरेक काम सत्य पथ खोजता है
निज धर्म ज्ञान को उकेरते रहेें सदा
निज धर्म ज्ञान को उकेरते रहेें सदा
~ रसिक ~
जुर्म केहुके नइखे बस मनवा बेचैन बा
जब से देखले बानी चंचल हमार नैन बा
दोष केकर दिआई जब दुनो बेकरार बा
दिल पो हाथ ध के कहीं केकर पीर अपार बा
जब से देखले बानी चंचल हमार नैन बा
दोष केकर दिआई जब दुनो बेकरार बा
दिल पो हाथ ध के कहीं केकर पीर अपार बा
~ रसिक ~
काका - काकी
************
बात बात पो ताना मरली
खोरना से काका के जरली
घर से काका गइले पराई
काकी आँख में आँसू भरली
************
बात बात पो ताना मरली
खोरना से काका के जरली
घर से काका गइले पराई
काकी आँख में आँसू भरली
जाड़ा से कठुआइल बाड़न
घरे से काका खेदाइल बाड़न
ककिया के गुस्सा के डर से
गाला में लुकाइल बाड़न
घरे से काका खेदाइल बाड़न
ककिया के गुस्सा के डर से
गाला में लुकाइल बाड़न
खाये के मांगलन ताजा गुझिया
काका सुभाव के हवन सोझिया
काकी के कहलन फुहरी के नानी
तबहीं से बढ़ गइल बा परेशानी
रसिक से कहलन बात सझुराव
ना फरिआई त दुअरिका के बोलाव
काकी के नाव से गाँव भर डेरात रहे
काकावा बेचारा रोजे रोजे पेरात रहे
काम ना करे कवनो अकिल कन्हईया के
काका सबूर धरीं निमन समईया के
काका सुभाव के हवन सोझिया
काकी के कहलन फुहरी के नानी
तबहीं से बढ़ गइल बा परेशानी
रसिक से कहलन बात सझुराव
ना फरिआई त दुअरिका के बोलाव
काकी के नाव से गाँव भर डेरात रहे
काकावा बेचारा रोजे रोजे पेरात रहे
काम ना करे कवनो अकिल कन्हईया के
काका सबूर धरीं निमन समईया के
काका - काकी ( भाग -2 )
नखरे उठाइये
काका काकी लड़ पड़े , बिन बात आपस में
उनकी लड़ाई देख , लुत्फ न उठाइये
उनकी लड़ाई देख , लुत्फ न उठाइये
काका बोले काकी से कि, चाय में चीनी है कम
चुटकी में चीनी जरा , जल्दी लेके आइये
चुटकी में चीनी जरा , जल्दी लेके आइये
काकी बोली रूक जाओ, आदमीं हूँ यंत्र नहीं
जल्दी है तो खुद आके , चीनी लेते जाइये
जल्दी है तो खुद आके , चीनी लेते जाइये
फेंक दिये काका चाय , काकी मैके चली गयी
काका अब काकी जी की , नखरे उठाइये
काका अब काकी जी की , नखरे उठाइये
उठाइये न काकीजी कर में कटार कभी
गुस्सा कर काकाजी पे हाथ न चलाइये
गुस्सा कर काकाजी पे हाथ न चलाइये
चलाइये न राज नित अपने हीं घर में
नयी पीढ़ी सोच नया, जिया न जलाइये
नयी पीढ़ी सोच नया, जिया न जलाइये
जलाइये न रक्त को गुस्सा कर रात दिन
चढ़ती जवानी में बुढ़ापा मत लाइये
चढ़ती जवानी में बुढ़ापा मत लाइये
लाइये मधुर भाव अपनी आचरण में
रक्त चाप सुगर की रिस्क न उठाइये
रक्त चाप सुगर की रिस्क न उठाइये
काका-काकी (भाग - 3)
मुझे देना उतना
काकी घर में अकेली , काका पंड़िताई करे
ब्रह्ममुहूर्त बेला में , दोनों का है उठना
ब्रह्ममुहूर्त बेला में , दोनों का है उठना
गऊ माता सेवा सुख , नित्य करे गीता पाठ
जिन्दगी में जानते हैं , गिरना सम्भलना
जिन्दगी में जानते हैं , गिरना सम्भलना
जितना मिला है रखो , उतना सहर्ष तुम
गैर के समान देख , कभी न मचलना
गैर के समान देख , कभी न मचलना
याद करो नित्य रब , प्राण जाये छूट कब
धर्म निभता हीं रहे , मुझे देना उतना
******
धर्म निभता हीं रहे , मुझे देना उतना
******
काका काकी की इच्छा
उतना सम्मान मिले , जितना का हक मेरा
ज्यादा कुछ मिल जाये , मुझे नहीं रखना
ज्यादा कुछ मिल जाये , मुझे नहीं रखना
रखना न मुफ्त माल , बन जाये जी जंजाल
हलाल की कमाई से , नेकी को परखना
हलाल की कमाई से , नेकी को परखना
परखना सभी शब्द , कर्ण प्रिय लगता हो
लोग करे वाह वाह , सत्य का हो सामना
लोग करे वाह वाह , सत्य का हो सामना
सामना हो प्रभु तेरा , रहते हो साथ नित
जितना है हक मेरा , देते मुझे उतना
जितना है हक मेरा , देते मुझे उतना
~ कन्हैया प्रसाद रसिक ~
जब मिलल नजरिया त कुछ कह गइल
एह जवानी के चोन्हा से मन भर गइल
निंद अचके में खुलल जब छुवलें रसिक
फिर न जानें कहाँ निंद उधिया गइल
एह जवानी के चोन्हा से मन भर गइल
निंद अचके में खुलल जब छुवलें रसिक
फिर न जानें कहाँ निंद उधिया गइल
रसिक
कंचन की काया कमाल करे
पनघट पर गोरिया धमाल करे
पनघट पर गोरिया धमाल करे
बिखर जाला लट खोले घूँघट के पट
देख मुखडा के दुखडा सुनावेले भट्ट
काहें अँखिया से अँखिया सवाल करे
देख मुखडा के दुखडा सुनावेले भट्ट
काहें अँखिया से अँखिया सवाल करे
पनघट..............
गगरी से सगरी छलकत बा नीर
बूँद बूँद चुवला से भिंजल शरीर
अँखिया के कोर से हलाल करे
पनघट...…..
बूँद बूँद चुवला से भिंजल शरीर
अँखिया के कोर से हलाल करे
पनघट...…..
बल खाये कमरिया अँजोरिया उगे
होंठ लाली के प्याली से मनवा पगे
रात सेजिया पर निंदिया बवाल करे
पनघट...............
कन्हैया प्रसाद रसिक
होंठ लाली के प्याली से मनवा पगे
रात सेजिया पर निंदिया बवाल करे
पनघट...............
कन्हैया प्रसाद रसिक
बलगर के ना दोष बा , दुबर झांके दुआर
पिडुरी चढ़लस पोंछ में , नइखे जान उबार
नइखे जान उबार , धार चढ़ल तेगवा में
आँख बचावे यार , ना केहु बा जगवा में
बोटी बोटी बँट गइल , बात न बनल रसगर
मद से भरल ह देह , दिखावे जग में बलगर
~ रसिक ~
पिडुरी चढ़लस पोंछ में , नइखे जान उबार
नइखे जान उबार , धार चढ़ल तेगवा में
आँख बचावे यार , ना केहु बा जगवा में
बोटी बोटी बँट गइल , बात न बनल रसगर
मद से भरल ह देह , दिखावे जग में बलगर
~ रसिक ~
**********
सभे बा भोजपुरिया सिपाही
पतन के सभे रोकी
जे भी चली कुमारग भाई
सभे ओहके टोकी
भोजपुरी ह रसगर भाषा
केहु न दाग लगावे
कतहु केहु काम करे
भोजपुरिये में बतियावे
रसिक