रा ** राउर बखान करीं हमरा में हूब नाहीं
धा ** धार भोजपुरिया के रउआ बहवनी
मो ** मोती जस चमकेनी भोज के गगन में
ह ** हपरल सेवा क के भाखा चमकवनी
न ** नरमी सुभाव रहे गीत से लगाव रहे
चौ ** चौरा भोजपुरिया के खूब गमकवनी
बे ** बेरि बेरि याद करे आज मन रउआ के
अं ** अंशुमाली जस जोत खुद के बनवनी
ज ** जय भोजपुरी भोजपुरिया जय बोलके
न ** नमन बा रसिक के गरवा लगवनी
हम त जननी रसिक जी सिखइहें लूर बढ़िया
बनाई दिहले ना उनके टिसन के पहरूआ
बनाई दिहले ना ।।
जात रहन अमही में खिंचले खाति पूड़ी
भाटपार सैंया के गड़ाई गइल मूड़ी
बाकासा उठाके माथ चलस अकसरूआ
बनाई दिहले ना उनके टिसन के पहरूआ
बनाई दिहले ना ।।
केहू ना सहइया भइले पाड़े आ तिवारी
बोझा देत रहे लोग आपन पारापारी
हमरो परान हवें सैंया जी दुलरूआ
बनाई दिहले ना उनके टिसन के पहरूआ
बनाई दिहले ना ।।
मिल जइहें रसिक जी त खोरना से दागब
गुर के कराह दुनो पाड़े लो के पागब
ताजा रहन हमरो , बनवले लोग अरूआ
बनाई दिहले ना उनके टिसन के पहरूआ
बनाई दिहले ना ।।
राउर बखान करीं हमरा में हूब नाहीं
धार भोजपुरिया के रउआ बहवनी
मोती जस चमकेनी भोज के गगन में
हपरल सेवा क के भाखा चमकवनी
नरमी सुभाव रहे गीत से लगाव रहे
चौरा भोजपुरिया के फूल गमकवनी
बेलपत्र शिवजी के रउओ पर चढ़ेला
अंशुमाली जस जोत
अमही में खीचीं पूड़ी टूटे नाहीं गोड़ मूड़ी
बचके नेवान तनी करीह ए पांड़े जी
मेहरी के पता चली मार के भगाई गली
अमही के मान तनी रखीह ए पांडे जी
लोगवा बनावे बात काहें ला भइल घात
मेहरी के गुनगान करीह ए पाड़े जी
छाला परे गोड़वा में लार चुवे ठोरवा में
हँसी के उड़ान खूब भरीह ए पाड़े जी
कल्हुए झरोखे चढ़ि चाननी के चदरी में,
रजनी चोन्हात रही तनिका-सा बन ठन।
अइसे समुझि परे अँचरा के डोलले से,
सिहरि समीर मदमत्त धावे रन बन।
पूनो के उजास से दमके देह बदरी के,
लपकि झपकि लिपटावेली पवन तन।
खुलि जाला ब्रह्मरंध्र सुधारस पीयले से,
शरद निशा के कर परस जीवन धन।
सुकवा के उगतहीं , चौंकि चले पौन-पंथी,
उत्तरी तलइया में , नहाले तीनडँड़िया,
कजरी रम्हाति बिया , निरखि के बछरू के
पोंछ ठाड़ कुरुचेली , अँकरे के पड़िया।
काँचे नीनि चुरूंगन , चहके उमंग भरि
घंटा धुनि गूंजे सुन , बाबाजी के मढ़िया
उषा के लिलार बिन्दी , ललछौहीं दीपति से
पुरुबी आकाशे जड़े , मूँगा कौन गढ़िया?
थके-माँदे नँवमाथ सूरुज चलल जाले,
धरती आकाश मधे पसरे सँवर रंग।
बन के तलाई में ललाई काँपे थोरी-थोरी,
झुरमुट ओटे कुछ चिरईं करेली जंग।
खेतवा के आरी कहीं दादुर भुजंग धरे,
साँसत के टर्र धुनि सुनि सिहरेला अंग।
क्षितिज के छोरि चारु ओरि होखे धूँआ-धूँआ।
टापाटोईं तरई से भरेली आकाश गंग।
रामदुअरिया मुरुगा बोलल , भइल भोर अगवानी।
आजा संगे बुतरू जागल , सुगहन राति परानी ।।
घुमरी खेले काल चकरिया , गोल-गोल घुरनाइल।
अनछूअल साबुत कतहीं बा , कतो धूरि भुसुराइल।।
कहीं डाढ़ि में अँखुआ फूटल , पुहुप कहीं मुसुकाइल ।।
एक फली कुछ कँचगर कोमल , आन कहीं पकठाइल।
परकिति बइठल बिंब रचावे , कीरति बनल अनोखा।।
पानी भीतर अगिन लुकारी , झाँकल किरिन झरोखा।
छिटपुट बदरी आसमान में , पीछे परल इँजोरा।।
सुगना के संसर्गे आते , समुद उठल हिलकोरा।।
परानी = भाग जाना
घुरनाइल = चक्कर काटना
भुसुराइल = भुरभुरा
पुहुप = पुष्प
अहले भोरे ठाड़ कछारे , लउकल एक अजूबा।
बीच समंदर खेलत रहुवे , लालरंग पनडुब्बा ।
तरे सतह पर, गोता मारे , मलिमलि देह नहाए।
लगे हकासल खलिहा पेटे , चुनचुन तम के खाए।
छुधा शांत करि बहरी झाँकल , चलल खेत हरजोरी।
गाछ बिरछ लतई फुलवा सभ , उमगल आँगन खोरी।
रसिक
हम कहनीं त झूठ बड़ , राउर कथनीं साँच।
हमता के तोसन बदे , इचिको लगे न आँच।।
बा बिबेक बनगोंइठी , आसमान में दंभ।
तन के सत्ता साँच बा , इहे गड़ी मलखंभ।।
उज्जर धपधप वस्त्र बा , मन कारिख भँड़सार।
लंपट लठधर संग में , चहुँदिसि जय जयकार।।
चापलूस पीछे पड़ल , चाँपे अनघा अन्न।
अरकठिया के भाग में , उहे कसैला कन्न।।
सरग-तरैयन तूरि के , आन दिहें महराज।
कवन परोजन कष्ट के , परल खुजाईं खाज।
गोड़ तोहे लागिना गँउआ के डीहबाबा
अमही में बाटे जुटान ,
भोजपुरिया भाखा के बढ़ी आज सान।।
बीड़ा उठवले बाड़े सतीशजी पहरूआ
माई भोजपुरिया के हउअन दुलरूआ
संगीत सुभाष संगे सारथी मदन भाई
छेड़ीहन छपरहिया तान ,
भोजपुरिया भाखा के बढ़ी आज सान।।
दीन हीन छीन नाहीं भाखा भोजपुरी
सबका के साथ लेके चलल बा जरूरी
गावँ गाँईं जबले ना जगिहें जवान लोग
मिली ना भइया सम्मान
भोजपुरिया भाखा के बढ़ी आज सान।।
भइया सुरेश जी के माथ पो पगरिया
उदय नारायण धइले गाँव के डगरिया
मुरूगा बोले से पहिले जाग जाले हिरदानंद
करेला पराती गुनगान,
भोजपुरिया भाखा के बढ़ी आज सान।।
माया बहिनियन के माया बिचित्तर बा
माई के सम्मान खाति मानस पवित्तर बा
धरम के धाजा फहरावेली प्रियंका बहिनी
बोलि बोलि मधुरी जुबान,
भोजपुरिया भाखा के बढ़ी आज सान।।
अंजन बाबा के असीस धरे माथ लोग
फौजी कन्हइया के बनल बाटे शुभ जोग
पांडे दिनेश अरु संजय के नजरिया से
भरी भोजपुरी उड़ान
भोजपुरिया भाखा के बढ़ी आज सान।।
नयका जमाना के बबुआ विबेक पांड़े
दूर देश धरती गनेश रोज झंडा गाड़े
जब लोग जुटी तब रंग चढ़ी,
अरु भोजपुरी सनमान बढ़ी।
सभ आपस में मिलिहें-जुलिहें,
सहभाव के रीति मिसाल गढ़ी।
जइह जब अमही, बलमु खइह कमहीं ,लवटहुँ के बा
मत जइह ओने रमही लवटहुँ के बा
सुनीना कि अमही के नीक हवा पानी
सबहीं चाल्हाक बाटे करे ना नादानी
भोजपुरिया के झंडा लेके चले उहाँ सबहीं
लवटहुँ के बा
फेसबुकिया रोग (व्यंग्य)
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जब से हमरा फेसबुकिया रोग लागल बा
तब से जिनिगी तबाह हो गइल बा
पुरा सुनला पो भी आधभेसरे बुझाता
एक दिन के बात ह
मलकिनी कहली
ए जी तनी ! कुकरवा चार गो सीटी मार दी त बंद क देब
हम छत पो कपड़ा पसारे ज तानी
हमरा बंद क देब
ओसहीं सुनाइल जइसे
द्रोणाचार्य के,
" अश्वत्थामा नाम नरो •••••••• "
सुनाइल रहे
ओह घरी कृष्ण के शंख बाजल रहे
आ "बंद क देब" के पहिले
पोरफाइल के पतरा देखत रहीं
फटाफट मोबाईल हाथ में पकड़ले
आ पोरफाइल पो नजर अटकवले
घर में घूम घूम देखे लगनी
कवन चीज खुलल बा
जेकरा के बंद करेके
मलकिनी कहले बाड़ी
मने मने अगरात रहीं कि
आज मलकिनी के मोका ना मिली
हमरा में छीब काटेके
ना त कतनो निमन काम क दीं
छीब काटे के उनकर आदत रहे
पुरा घर छान मरनी
कवनो चीज खुला ना मिलल
या त ढ़कल रहे भा बंद रहे
हमरा आँखी के सोझा
कुकर चिचिआत रहे
हमरा से कहत रहे
अरे बुड़बक!
हम ही खुला बानी
जल्दी से बंद कर
ना त बकोटा जइबे
बाकि हमरा
कुकर के आवाज
ना सुनाइल
तले देखतिनी
मलकिनी दउरल आवत बारी
हम पुछ देनी
का खुला बा
जेकरा के बन करेके कहले रहलु
तले उकहली
तनि आपन मोबाइल दीं त
हम जननी कि
अपना नइहर से
बतियावे खातिर
मोबाईल मांग तारी
बाकि इ का
मोबाइल के त
पटकउआ मोड में चल गइल
बेचारा मोबाईल
आपन बोटी बोटी तुरवा के
टुकुर टुकुर ताकत रहे
आ हमरा के ललकारत रहे
मालिक! आपन मरदानगी दिखाईं
आ दुचार झाप मलकिनी के लगाईं
ललकार सुनके
हमार हाथ त उठल
बाकि तेवर देखते जुड़ गइल
अवरू कुछ पुछे से पहिलहीं
जबाब मिल गइल
इहे खुला रहे हम बन क देनी
आ एफ एम रेडियो शुरू हो गइल
इ मोबाइल ना हमार सौत हिअ
जब देखीं त एही में
लपटाईल रहतानी
जइसे घर में अवरू केहु
हइले नइखे।
हम चुप चाप टुकौर टुकुर
ताकत रहीं कबो मोबाईल के
त कबो मलकिनी के
बात सब समझ में आ गइल
सभ गजटेडई
गोबर में गड़ा गइल
पुरे घर में पता ना चलल कि
दिल जरला के गंध बा कि दाल
चुपचाप रसोई में जाके
कुकर खोलनी त भक मार देलस
पते ना चलल कि एह में
दाल बनत रहे
बिना कहले लाग गइनी
एक घंटा रगड़े में हाथ चढ़ गइल
आज हमार
फौजी वाला हिम्मत के
भरम टूट गइल
फिर से कुकर में दाल रखके
देखावे गइनी
एतना दाल ठीक नु बा
अइसे पुछनी जइसे
जंग के युद्ध बंदी होखीं
जबाब मिलल
सोझा से हटीं ना त••••
समझ गइनी
आज सबहरिये एकादशी व्रत बा
बाकि हम त व्रत ना करेनी
आ हिम्मत नइखे कि
बाजार जाके कुछ खालीं
सभके से निहोरा बा
चार गो समोसा भेजवा दीं हाली
केहुके लागत होखे
कि हमरा के
पढ़े बिना मन ना लागता
त एगो चालिस हजार वाला
हलुक फलुक मोबाइलो
भेजवा दीं
कहें से कि एक महिना
हमरा हिम्मत के
यथास्थान आवे में लाग जाई
तले विदा लेत बाड़े
बाबा रसिक कन्हाई
जिनिगी निबाहे खाति भाखा नाहीं चाहीं कहीं
आँख के इशारा सारी दुनिया में चलेला
अँखिये से मान मिले अँखिये करावे मल्ल
अँखिये से सभ लोग दिलवा में बसेला
कजरारी आँख देखि कवि घूमे कल्पना में
अँखिया भूअरकी से छूरिया नू हलेला
टक टक देखे आँख जान जाला लोग सभ
हाथ जोर रब के धेयान लोग करेला
हिम्मत न हारे कभी नाज करे हाथ पर
काम के महान नित माने भोजपुरिया
पगरी कपार पर हाथ में कुदारी लेके
धरती के खोद के सँवारे भोजपुरिया
गणित के क्लिष्ट प्रश्न छन में सुधार देबे
तबो ना गुमान कबो करे भोजपुरिया
नरमी सुभाव मधे मोका पो कठोर होला
ईंट के जबाब पथरे दे भोजपुरिया
आग पाछ जाने नाहीं सीधा सीधा बात करे
दिहला पो प्यार सट जाला भोजपुरिया
आँख जे देखावे केहू भुभुन भँभोर लेबे
दाँत तुर हाँथ धर देला भोजपुरिया
लउर से भउर खोरे ताल ठोके जाँघ पर
केहुए से हार नाहीं खा ला भोजपुरिया
सीमावा पो खाड़ रहे हाथ में बनुख लेके
काल होखे सोझा ना डेराला भोजपुरिया
हमनी के हईंजा बिहार से ए भाइजी ×2
पसीना के कमाई पो रहेला भरोसा
दोसरा के नीक नाहीं लागेला परोसा
सभके से बात होला प्यार से ए भाइजी।
हमनी के हईंजा बिहार से।।
हर जाति धरम के लोग संगें रहेला
आपस में मिलजुल के सुख-दुख सहेला
सादा जीवन उँचुका विचार से ए भाइजी।
हमनी के हईंजा बिहार से।।
देशवा के शान खाति जान लो गँवावेला
पूरा हिन्दुस्तान आपन घरवे बतावेला
डरेला ना मुदई के वार से ए भाइजी।
हमनी के हईंजा बिहार से।।
माई बाबू चाचा चाची रहे परिवार में
फरक ना पड़े कबो कवनो बेवहार में
जोत जरे बाबा के लिलार से ए भाइजी ।
हमनी के हईंजा बिहार से।।
हिरदानन विशाल से बा रसिक के इयारी
घूमरी परउआ खेले दुनो पारा पारी
हवें जभो जभो परिवार से ए भाइजी।
हमनी के हईंजा बिहार से ।।